#आओ_प्रकृति_की_ओर_लौटें रासायनिक उर्वरको व रासायनो से जमीन के अन्दर रहने वाले सूक्ष्म जीव समाप्त, कीटनाशकों से खेतों पर मंडराने वाले लाभदायक मित्र कीट समाप्त, खरपतवार नाशकों से वानस्पतिक जैवविविधता समाप्त । सभी जीवों को मारकर जो अन्न पैदा किया जा रहा है, उसको खाकर मनुष्य आखिर कब तक स्वस्थ (जीवित) रहेगा ? देर-सबेर प्रकृति की ओर लौटना ही होगा । कहीं देर न हो जाये । आओ प्राकृतिक खेती करें और अन्य को प्रेरित करें.

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  • कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर मे ‘भूमि सुपोषण एवं संरक्षण अभियान’ हुआ आयोजित

    गोविन्दनगर/समचार
    कृषि विज्ञान केंद्र गोविन्दनगर  ने आज ‘भूमि सुपोषण एवं संरक्षण अभियान’  का आयोजन किया।
    कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष श्री अनिल जी अग्रवाल, न्यास के सहसचिव श्री केशव जी महेश्वरी, केंद्र के प्रभारी डॉ संजीव कुमार गर्ग, कीट वैज्ञानिक ब्रजेश नामदेव, मृदा विशेषज्ञ डॉ प्रवीण सोलंकी, रावे छात्र एवं उन्नतशील किसान गोपाल कुशवाहा, बालकिशन कुशवाहउपस्थित रहे

    सभी ने बारी बारी से घट मे रखे मिट्टी की पूजन की तत्पश्चात केंद्र के प्रभारी डॉ संजीव कुमार गर्ग ने कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा की किसानों को मिट्टी में सूक्ष्म जीवों और केंचुओं की आबादी के महत्त्व को जाने।  उन्होंने कृषि-रसायनों के उपयोग को कम करके प्रकृति को बचाने का भी आग्रह किया साथ मे मिट्टी की उत्पादकता को कम करने और रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अधिक उपयोग से इसे जहरीला बनाने पर अपनी चिंता व्यक्त की। इस तरह भोजन में विषाक्त तत्त्व मानव स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन जाते हैं। उन्होंने गाय आधारित खेती को वर्तमान समस्या का एकमात्र समाधान माना।

    डॉ प्रवीण सोलंकी सभी को सम्बोधित करते हुए कहा की भूमि के सुपोषण से संबंधित जागरूकता अभियान में किसानों की सभी समस्याओं का निदान संभव है। भूमि सुपोषित होगी तो उत्पादन भी अच्छा होगा भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी तो किसानों को रासायनिक उर्वरक व कीटनाशकों का उपयोग नहीं करना होगा। जैविक खेती के माध्यम से खेती करने पर फसल की उत्पादन लागत में कमी आएगी।

    कार्यक्रम के अंत मे न्यास के प्रभारी श्री अनिल जी ने सभी को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष की शुभकामनायें देते हुए कहा की भूमि सुपोषण अभियान खेती की भूमि में रासायनिक प्रयोग से फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव, बंजर होती भूमि, मानव के स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभाव को रोकने हेतु किया जा रहा है

    अतः हम सभी को इस अभियान को आगे बढ़ाना है।

     

     

     

Circular

  • ट्राई को कार्ड का उपयोग कर लाखो रूपये बचाए

  • मूंग की खेती में तरल जैव उर्वरक का उपयोग करे

  • #नरवाई #नरवाई_न_जलाये #आओ_प्रकृति_की_ओर_लौटें # #ध

  • https://www.youtube.com/live/0crRr7OxFYw?feature=s
    किसान मेला
  • कृषि विज्ञान मेला
    किसान मेला ...किसान मेला ..... 7 मार्च 2024 , दिन - गुरुवार , समय - प्रातः 10 बजे से कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर, नर्मदापुरम
  • गेहूं में उर्वरक एवं पौध संरक्षण
    गेहूं में उर्वरक एवं पौध संरक्षण एन.पी.के. (N:P:K) गेहूं उगाये जाने वाले ज्यादातर क्षेत्रों में नत्रजन की कमी पाई जाती है। फास्फोरस तथा पोटाश की कमी भी क्षेत्र विशेष में पाई जाती है। इसी प्रकार सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे- जस्ता, मैगनीज तथा बोरान की कमी गेहूं उगाये जाने वाले क्षेत्रों में देखी गई है। इन सभी तत्वों को भूमि में मृदा - परीक्षण को आधार मानकर आवश्यकता अनुसार प्रयोग करें, लेकिन ज्यादातर किसान विभिन्न कारणों से मृदा परीक्षण नहीं करवा पाते हैं। ऐसी स्थिति में गेहूं के लिये संस्तुत दर निम्न हैं असिंचित दशा में उर्वरकों का 100:40:40 तथा सिंचित दशाओं में 120:60:40 के अनुपात में नत्रजन, फास्फोरस एवं पोटाश देना चाहिए।फास्फोरस एवं पोटाशकी पूरी मात्रा तथा नत्रजन की 50% मात्रा बुवाई के साथ देना चाहिए एवंनत्रजन की शेष 50% मात्रा में से 25% मात्रा प्रथम सिंचाई के बाद तथा शेष आधा तृतीय सिंचाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के रूप में दे । गेहूं में गंधक (Sulphur) की कमी को दूर करें गंधक (Sulphur) की कमी को दूर करने के लिये गंधक युक्त उर्वरक जैसे अमोनियम सल्फेट अथवा सिंगल सुपर फास्फेट का प्रयोग अच्छा रहता है । जस्ते की कमी-हल्की भूमि में जस्ते की कमी होने पर नीचे से तीसरी या चौथी पुरानी पत्ती के मध्य में हल्के पीले धब्बे दिखाई देते हैं। ऐसे लक्षण होने पर 5 किग्रा यूरिया और एक किग्रा जिंक सल्फेट 200 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें।जस्ते की कमी वाले क्षेत्रों में जिंक सल्फेट 25 कि.ग्रा./हे. की दर से धान-गेहूं फसल चक्र वाले क्षेत्रों में साल में कम से कम एक बार प्रयोग करें। गेहूं में पौध संरक्षण गेहूं की फसल में बथुआ, कडाई, जंगली पालक,गुल्ली डंडा, प्याजी, जंगली जई आदि खरपतवार पाये जाते हैं। इनके उन्मूलन के लिये कस्सी / कसोला से निराई गुड़ाई करें। अधिक मात्रा में खरपतवार होने पर निम्नलिखित खरपतवारनाशी का प्रयोग करें गुल्ली डंडा एवं जंगली जई के लिए 500 ग्राम सल्फोसल्फ्युरान 200 लीटर पानी में मिलाकर बुआई के 25-30 दिन के बाद स्प्रे करें। कंडाई या अन्य चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के विनाश के लिये मैटसल्फ्यूरान (एलग्रिप एलगो, हुक) 8 ग्राम / एकड़ की दर से बिजाई के 25-30 दिन बाद छिडकाव करेंया चौड़ी एवं सकरी पत्ती के खरपतवारों के नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्युरान+मैटसल्फ्यूरान 16ग्राम/एकड़ की दर से 200 लीटर पानी मिलाकर छिडकाव करें। बीमारियां एवं रोकथाम गेहूं की फसल में पीला, भूरा या काला रतुआ दिसम्बर, जनवरी फरवरी में कम तापक्रम होने से आता है । रोगरोधी किस्मों के अलावा Azoxystrobin 11% + Tebuconazole 18.3% SC या thiophanate methyl 70% WPका एक ग्राम या एक मिली लीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव कर दें ।
  • गोविन्द तरल जैव उर्वरक ( ट्राइकोडर्मा विरडी)
    गोविन्द तरल जैव उर्वरक ( ट्राइकोडर्मा विरडी) " तरल जैव उर्वरक अपनाएं, मृदा की उर्वरता बढाए" लाभ पूर्ण रूप से जैविक पदार्थ । फफूंद जनित रोगों से बचाव में सहायक । फसल को रोग एवं कीट रोधी बनाता है । जड़ों को अधिक विकसित करता है । मृदा में लाभदायक सूक्ष्म जीवों की संख्या बढाता हैं। फसल में हरापन बढाकर बढ़वार में वृद्धि करता है। फसल की सभी अवस्थाओं में उपयोगी। बीज उपचार 2.5 मि.ली. तरल जैव उर्वरक को 1 कि.ग्रा. बीज की दर से बीज उपचार करें। मृदा उपचार: 1 लीटर तरल जैव उर्वरक को 50 कि.ग्रा. गोबर की खाद में मिलाकर प्रति एकड़ प्रयोग करें । प्रयोग से पूर्व पदार्थ को अच्छे से हिलाएं । ठन्डे एवं छायादार स्थान पर भण्डारित करें। जैव उर्वरक का प्रयोग किसी भी रसायन के साथ मिलाकर नही करना चाहियें ।
  • गोविन्द देसी घी
    परम्परागत बिधि से निर्मित भारतीय नस्ल (साहिवाल) गाय के A2 दूध से बना गोविन्द देसी घी स्वाद और शुद्धता ऐसी जो दिल जीत ले | प्राप्त करने के लिए संपर्क करे - कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर पलिया पिपरिया , बनखेडी, नर्मदापुरम 7987979803
  • उपलब्ध सामग्री

  • ग्रेडिंग सुविधा उपलब्ध है

  • किसान सारथी मोबाइल आधारित कृषि सलाह सेवा
    सभी कृषक बंधू ध्यान देवे https://forms.gle/ACyKyR2Fe3zG37ma6 किसान सारथी मोबाइल आधारित कृषि सलाह सेवा में आपका स्वागत है, यह सेवा आपके कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर, नर्मदापुरम के द्वारा निःशुल्क दी जा रही है, ऊपर दिए लिंक पर क्लिक कर अपना पंजीयन कराये एवं कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर, नर्मदापुरम काल सेंटर पर काल कर कृषि से सम्बंधित जानकारी एवं समस्याओं का समाधान प्राप्त करे | यदि आप इस सेवा के लिए इच्छुक नहीं है तो इस नंबर 01204741923 पर कॉल करे. पंजीयन के बाद Toll free number – 14426/1800-123-2175 पर काल कर कृषि से सम्बंधित जानकारी एवं समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते है |
  • KVK में उत्पादन उत्पाद क्रय हेतु उपलब्ध है

  • पौधो में विभिन्न पोषक तत्वों की कमी के लक्षण

  • मलेरिया से सावधान होने का समय है ध्यान दे |

  • कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ने के लिए क्लीक करे
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